Saturday, May 27, 2006

क्या चीँटे की जान

आज सुबह सुबह शेव करते हुए अचानक वाश बेसिन में देखा, एक काला मोटा चीँटा घूम रहा था। इस डर से कि अभी बच्चे ब्रश करने आएंगे तो कहीं चींटा उन्हे काट न ले, मैने शेव के मग्गे का पूरा पानी चीँटे पर उढ़ेल दिया। मैंने सोचा चीँटा बह जाएगा। मगर थोड़ी देर में देखा, चीँटा फ़िर वाश बेसिन के छेद से निकल कर वाश बेसिन मे घूमने लगा। मैने दोबारा और फ़िर तिबारा पानी का भरा मग्गा उस पर उढ़ेल दिया, मगर हर बार वह विजयी हो कर छेद से वापिस निकल आता।

आज पूरा दिन वह मोटा, काला चीँटा बार बार धीरे धीरे वाश बेसिन पर चढ़्ता, मेरी आँखों के आगे घूमता रहा।

क्या तो चीँटे का शरीर और क्या चीँटे की जान, मगर वो हारा नहीं। कमजोर नहीं हुआ मुश्किलों के आगे।

एक हम इंसान हैं!

ताकतवर शरीर, तेज बुद्धी, हर प्रकार की सुविधा, मगर जिंदगी कि छोटी छोटी परेशानियों से कैसे घबरा जाते हैं।

अभी कल ही की बात है दिल्ली पब्लिक स्कूल की एक छात्रा ने कम नंबर आने पर आत्महत्या कर ली।

Tuesday, May 23, 2006

पप्पू पास हो गया

आज बाहरवीं के नतीजे आ गये। हमारे समाज में बाहरवीं की परिक्षा इतनी महत्वपूर्ण कर दी गईं हैं छात्रों के लिये कि जब तक ९०% से अधिक नंबर नहीं आते, न तो मन पसन्द कोर्स ही मिलता है और न ही मन पसन्द कालेज। मजबूरी और निराशा में करो बी ए पास।
कभी सोचा है- अभी जिन्दगी ठीक से शुरू भी नहीं हो पाती और एक गहरी निराशा भर जाती है मन में।
लगता है हमारे समाज में दिखने वाली निराशा और उत्साह की कमी के पीछे हमारी शिक्षा व्यवस्था की कमियां ही हैं।

Sunday, May 21, 2006

चाँदनी चौक में

गृह कलेश, दुर्भाग्य दूर करने के लिये और सुख शांति के लिये - टोने टोटके
जी नहीं, ये में किसी चाँदनी चौक के सार्वजनिक सुविधाओं वाले स्थान पर पाये जाने वाले इस प्रकार के पोस्टरों की बात नहीं कर रहा, ये शीर्षक हैं आजकल नारद के RSS feed पर कुछ नई पोस्टों के।
अगर किसी के पास हो तो कोई नींबू और मिर्ची के फ़ोटो हमें भी ईमेल कर दो भाई, अपने ब्लाग पर लगाऊंगा, कहीं नजर न लग जाए।

Sunday, May 14, 2006

दस रुपये दो न माँ

मेरा बाहरवीं का रिज्ल्ट आया था उस दिन। बहुत अच्छे नंबर आये थे। क्लास में टॉप किया था। मैं बहुत खुश था। में पल भर के लिये घर में क्या चल रहा है यह भी भूल गया था।
स्कूल से आया तो मेरे पास होने का गली में शोर सा मच गया। घर में जैसे ही घुसा तो एकदम ठिठक सा गया।

माँ बहुत बीमार चल रहीं थीं।
थोड़ी देर में माँ ने बुलाया, तकिए के नीचे से दस रुपये निकाल कर दिये।
कुछ बोल न पाईं।
इसके दो दिन बाद ही वो चल बसीं।
आज मातृ दिवस पर वो दस रूपये मिल नहीं रहे, जाने कहाँ रख दिये।

दस रुपये दो न माँ !!!!

Saturday, May 13, 2006

एक नया मंच "परिचर्चा"

सजाल पर हिन्दी व इस से संबधित विषयों व अन्य रोचक विषयों पर हिन्दी में चर्चा के लिए एक परिचर्चा एक नया सजाल है। यहाँ पर हिन्दी में शुभारंभ, ब्लॉगजगत, व वादविवाद जैसे मंच हैं जिन में आप के जैसे ही हिन्दी प्रेमी भाग ले रहें हैं। आप भी इस के सदस्य बनिए व इन विषयों पर चर्चा आरंभ करें। तो आइए चर्चा करें।

Friday, May 05, 2006

चौटाला की रोटी

'चौटाला परिवार की संपत्ति 1467 करोड़'
खाते तो आटे की ही रोटी होंगे। नहीं?