Saturday, June 17, 2006

अपने प्यारे पापा को

कल फ़ादर डे पर


सुबह सुबह ऑफ़िस जाते हुए


अपने प्यारे पापा को जब मैं ग्रीटिंग कार्ड दूंगी


थैंक्यू बेटे कह कर वे मुस्कुराएंगे


मगर हल्के से जरूर झेंप जाएंगे।


दो बातें भी नहीं कर पाएंगे


ऑफ़िस को देर हो जाएगी।


शाम को काम से फ़िर देर से आएंगे।


बहुत ही अच्छे हैं मेरे पापा,


जो भी मांगो ले कर देते हैं।


मगर अक्सर कंप्यूटर पर गेम्स खेलते हुए सोचती हूं


काश कभी हम अपने पापा के साथ अंत्याक्षरी खेल पाते......



5 comments:

अनूप शुक्ला said...

आज इतवार को भी पापा आफिस गये हैं या अन्ताक्षरी का समय निकाल लिया?

Jagdish Bhatia said...

इतवार को पापा सो कर अपनी नींद पूरी करते हैं।

Sangeeta Manral said...
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Sangeeta Manral said...

वैसे आईना जी,
आजकल अच्छे गाने हैं कहाँ अन्ताक्षरी के लिये आजकल के बच्चे तो "हिमेश" अंकल के गानों को ही याद रखते हैं जो शायद पापा लोगो को पंसद ना आयें ;-)

Jagdish Bhatia said...

जी संगीता जी,
शायद इसी लिये पापा के मोहमद रफ़ी और बच्चोंके हिमेश अंकल के बीच अंत्याक्षरी जमती नहीं।