Thursday, June 01, 2006

अनुगूँज 20: नेतागिरी, राजनीति और नेता

तकनीकि कारणों से इस पोस्ट को दोबारा प्रकाशित कर दिया गया है।

2 comments:

Neeraj said...

हमें तो पहले ही पता है कि ये कथा काल्पनिक है. आप जैसा ज़हीन शख़्स राजनीति में थोड़ी आ सकता है. कोशिश भी मत कीजिएगा. वैसे ही हिन्दी के चिट्ठाकारों की कमी है, आप सियासत में चले जाएंगे तो यहां कौन संभालेगा.

Sindhu said...

बहुत ही अच्छा है!!!!!!!