मैं प्रतीक की बात से पूरी तरह सहमत हूँ. बस इतना जोड़ना चाहूँगा कि चौटालाओं की रोटी पकाई नहीं जाती, बल्कि बेबस और लाचार जनता की चिताओं पर सेंकी जाती है.
अभी कहां भाई.. अभी तो चार्जशीट बनेगी, मुक़दमा चलेगा, गवाही होंगीं, फैसला आएगा. ऊपरी कोर्ट में अपील होगी फिर वही सब दोहराया-तिहराया जाएगा.. तब तक आप भूल चुके होंगे और सरकार बदल चुकी होगी. सीबीआई केस कमज़ोर कर देगी. कैसा चौदह सौ करोड़.. हमें पता नहीं
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6 comments:
हाँ, बस फ़र्क इतना है कि उस आटे को पानी की बजाय ग़रीबों के ख़ून से माड़ा जाता है।
मैं प्रतीक की बात से पूरी तरह सहमत हूँ. बस इतना जोड़ना चाहूँगा कि चौटालाओं की रोटी पकाई नहीं जाती, बल्कि बेबस और लाचार जनता की चिताओं पर सेंकी जाती है.
अरे,अभी तो ना जाने कितने चौटाला और बाकी हैं,गिनती की तो बस शुरुवात है।
खुशी यह है कि कम से कम अभियान चालू तो हुआ।
समीर लाल
सरकार में आने पर हर किसी का यही मकसद होता है कि जल्दी से जल्दी जितना हो सके पैसा बनाओ। शायद अगर उस जगह हम आप हों तो यही करेंगे।
पर चौटाला की चौट्टाई दुनिया के सामने आ गई बाकी का नंबर कब लगेगा..
अभी कहां भाई.. अभी तो चार्जशीट बनेगी, मुक़दमा चलेगा, गवाही होंगीं, फैसला आएगा. ऊपरी कोर्ट में अपील होगी फिर वही सब दोहराया-तिहराया जाएगा.. तब तक आप भूल चुके होंगे और सरकार बदल चुकी होगी. सीबीआई केस कमज़ोर कर देगी. कैसा चौदह सौ करोड़.. हमें पता नहीं
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